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वाल्मीकि रामायण 17.7

लम्बकर्णललाटाम् च लम्बोदरपयोधराम् ।
लम्बोष्ठीं चुबुकोष्ठीं च लम्बास्याम् लम्बजानुकाम् ।। ५-१७-७।।

पूरा अध्याय