ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1717.30वाल्मीकि रामायण 17.30ताम् क्षमां सुविभक्ताङ्गीं विनाभरणशोभिनीम् । प्रहर्षमतुलम् लेभे मारुतिः प्रेक्ष्य मैथिलीम् ।। ५-१७-३०।।पिछलाअगलापूरा अध्याय