ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1717.10वाल्मीकि रामायण 17.10वराहमृगशार्दूलमहिषाजशिवामुखीः । गजोष्ट्र हयपादीश्च निखातशिरसोपराः ।। ५-१७-१०।।पिछलाअगलापूरा अध्याय