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वाल्मीकि रामायण 16.27

दुष्करम् कुरुते रामो हीनो यद् अनया प्रभुः ।
धारयति आत्मनो देहम् न दुह्खेन अवसीदति ॥५-१६-२७॥

पूरा अध्याय