ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1616.24वाल्मीकि रामायण 16.24काम भोगैः परित्यक्ता हीना बन्धु जनेन च । धारयति आत्मनो देहम् तत् समागम कान्क्षिणी ॥५-१६-२४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय