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वाल्मीकि रामायण 16.2

स मुहूर्तम् इव ध्यात्वा बाष्प पर्याकुलेक्षणः ।
सीताम् आश्रित्य तेजस्वी हनुमान् विललाप ह ॥५-१६-२॥

पूरा अध्याय