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वाल्मीकि रामायण 15.36

बाष्प अम्बु प्रतिपूर्णेन कृष्ण वक्त्र अक्षि पक्ष्मणा ।
वदनेन अप्रसन्नेन निह्श्वसन्तीम् पुनः पुनः ॥५-१५-३६॥

पूरा अध्याय