ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1515.32वाल्मीकि रामायण 15.32शोक जालेन महता विततेन न राजतीम् । सम्सक्ताम् धूम जालेन शिखाम् इव विभावसोः ॥५-१५-३२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय