ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1515.28वाल्मीकि रामायण 15.28यथा रूपा हि दृष्टा वै तथा रूपा इयम् अन्गना । पूर्ण चन्द्र आननाम् सुभ्रूम् चारु वृत्त पयो धराम् ॥५-१५-२८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय