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वाल्मीकि रामायण 15.16

स ददर्श अविदूरस्थम् चैत्य प्रासादम् ऊर्जितम् ।
मध्ये स्तम्भ सहस्रेण स्थितम् कैलास पाण्डुरम् ॥५-१५-१६॥

पूरा अध्याय