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वाल्मीकि रामायण 15.14

नाना निनादैः उद्यानम् रम्यम् मृग गणैर् द्विजैः ।
अनेक गन्ध प्रवहम् पुण्य गन्धम् मनो रमम् ॥५-१५-१४॥

पूरा अध्याय