ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1414.8वाल्मीकि रामायण 14.8प्रहृष्ट मनुजे कले मृग पक्षि समाकुले । मत्त बर्हिण सम्घुष्टाम् नाना द्विज गण आयुताम् ॥५-१४-८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय