ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1414.47वाल्मीकि रामायण 14.47राम शोक अभिसम्तप्ता सा देवी वाम लोचना । वन वास रता नित्यम् एष्यते वन चारिणी ॥५-१४-४७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय