ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1414.16वाल्मीकि रामायण 14.16हनूमता वेगवता कम्पिताः ते नग उत्तमाः । पुष्प पर्ण फलानि आशु मुमुचुः पुष्प शालिनः ॥५-१४-१६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय