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वाल्मीकि रामायण 14.10

उत्पतद्भिर् द्विज गणैः पक्षैः सालाः समाहताः ।
अनेक वर्णा विविधा मुमुचुः पुष्प वृष्टयः ॥५-१४-१०॥

पूरा अध्याय