ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1111.40वाल्मीकि रामायण 11.40निश्चित एक अन्त चित्तस्य कार्य निश्चय दर्शिनी । कामम् दृष्ट्वा मया सर्वा विश्वस्ता रावण स्त्रियः ॥५-११-४०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय