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वाल्मीकि रामायण 11.38

इदम् खलु मम अत्यर्थम् धर्म लोपम् करिष्यति ।
न हि मे पर दाराणाम् दृष्टिर् विषय वर्तिनी ॥५-११-३८॥

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