Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 10.15

कान्चन अन्गद नद्धौ च ददर्श स महात्मनः ।
विक्षिप्तौ राक्षस इन्द्रस्य भुजाव् इन्द्र ध्वज उपमौ ॥५-१०-१५॥

पूरा अध्याय