ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1010.1वाल्मीकि रामायण 10.1तत्र दिव्य उपमम् मुख्यम् स्फाटिकम् रत्न भूषितम् । अवेक्षमाणो हनुमान् ददर्श शयन आसनम् ॥५-१०-१॥अगलापूरा अध्याय