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वाल्मीकि रामायण 1.95

तस्मात्संचोदयामि त्वामुत्तिष्ठ गिरिसत्तम ।
न एष कपिशार्दूलस्त्वमुपर्येति वीर्यवान् ॥५-१-९५॥

पूरा अध्याय