ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 11.8वाल्मीकि रामायण 1.8स सूर्याय महेन्द्राय पवनाय स्वयंभुवे । भूतेभ्यश्चाञ्जलिं कृत्वा चकार गमने मतिम् ॥५-१-८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय