ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 11.78वाल्मीकि रामायण 1.78शुशुभे स महातेजा महाकायो महाकपिः । वायुमार्गे निरालम्बे पक्षवानिव पर्वतः ॥५-१-७८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय