ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 11.71वाल्मीकि रामायण 1.71विकर्षन्नूर्मिजालानि बृहन्ति लवणाम्भसि । पुप्लुवे कपिशार्दूलो विकिरन्निव रोदसी ॥५-१-७१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय