ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 11.43वाल्मीकि रामायण 1.43एवमुक्त्वा तु हनुमान्वानरान्वानरोत्तमः ॥५-१-४३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय