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वाल्मीकि रामायण 1.37

मार्गमालोकयन्दूरादूर्ध्वं प्रणिहितेक्षणः ।
रुरोध हृदये प्राणानाकाशमवलोकयन् ॥५-१-३७॥

पूरा अध्याय