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वाल्मीकि रामायण 1.25

कृतक्ण्ठगुणाः क्षीबा र्क्तमाल्यानुलेपनाः ।
र्क्तक्षाः पुष्कराक्षाश्च गगनं प्रतिपेदिरे ॥५-१-२५॥

पूरा अध्याय