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वाल्मीकि रामायण 1.200

जगामाकाशमाविश्य पन्नगाशनवत्कपिः ।
प्राप्तभूयिष्ठपारस्तु सर्वतः प्रतिलोकयन् ॥५-१-२००॥

पूरा अध्याय