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वाल्मीकि रामायण 1.196

हृतहृत्सा हनुमता पपात विधुराम्भसि ।
तां हतां वानरेणाशु पतितां वीक्ष्य सिंहिकाम् ॥५-१-१९६॥

पूरा अध्याय