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वाल्मीकि रामायण 1.194

ततस्तस्या नखैस्तीक्णैर्मर्माण्युत्कृत्य वानरः ।
उत्पपाताथ वेगेन मनः संपातविक्रमः ॥५-१-१९४॥

पूरा अध्याय