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वाल्मीकि रामायण 1.190

वक्त्रं प्रसारयामास पाताLआन्तरसन्निभम् ।
घनराजीव गर्जन्ती वानरं सम्भिद्रवत् ॥५-१-१९०॥

पूरा अध्याय