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वाल्मीकि रामायण 1.185

समाक्षिप्तोऽस्मि तरसा पञूकृतपराक्रमः ।
प्रतिलोमेन वातेन महानौरिव सागरे ॥५-१-१८५॥

पूरा अध्याय