ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 11.181वाल्मीकि रामायण 1.181प्रदृश्यमानः सर्वत्र हनुमान्मारुतात्मजः । भेजेऽम्बरं निरालम्बं लम्बपक्ष इवाद्रिराट् ॥५-१-१८१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय