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वाल्मीकि रामायण 1.177

वहता हव्यमत्यर्थं सेविते चित्रभानुना ।
ग्रहनक्षत्रचन्द्रार्कतारागणविभूषिते ॥५-१-१७७॥

पूरा अध्याय