ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 11.171वाल्मीकि रामायण 1.171अर्थसिद्ध्यै हरिश्रेष्ठ गच्छ सौम्य यथासुखम् । समानयस्व वैदेहीं राघवेण महात्मना ॥५-१-१७१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय