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वाल्मीकि रामायण 1.14

तेन चोत्तमवीर्येण पीड्यमानः स पर्वतः ।
सलिलं संप्रसुस्राव मदं मत्त इव द्विपः ॥५-१-१४॥

पूरा अध्याय