ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 77.5वाल्मीकि रामायण 7.5अलम् वैक्लव्यम् आलम्ब्य धैर्यम् आत्मगतम् स्मर । त्वत् विधानाम् न सदृशम् ईदृशम् बुद्धि लाघवम् ॥४-७-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय