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वाल्मीकि रामायण 7.24

एवम् एकान्त संपृक्तौ ततः तौ नर वानरौ ।
उभौ अन्योन्य सदृशम् सुख दुःखम् अभाष्ताम् ॥४-७-२४॥

पूरा अध्याय