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वाल्मीकि रामायण 67.49

स वेगवान् वेग समाहित आत्माहरि प्रवीरः पर वीर हन्ता ।
मनः समाधाय महाअनुभावोजगाम लंकाम् मनसा मनस्वी ॥४-६७-४९॥

पूरा अध्याय