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वाल्मीकि रामायण 67.46

त्यज्यमान महा सानुः संनिलीन महा उरगः ।
शैल शृन्ग शिला उत्पातः तदा अभूत् स महा गिरिः ॥४-६७-४६॥

पूरा अध्याय