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वाल्मीकि रामायण 67.31

उवाच परिसंहृष्टो जांबवान् प्लवगेश्वरः ।
वीर केसरिणः पुत्र वेगवन् मारुत आत्मज ॥४-६७-३१॥

पूरा अध्याय