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वाल्मीकि रामायण 66.9

विख्याता त्रिषु लोकेषु रूपेणा अप्रतिमा भुवि ।
अभिशापात् अभूत् तात कपित्वे काम रूपिणी ॥४-६६-९॥

पूरा अध्याय