ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 6666.27वाल्मीकि रामायण 66.27प्रसादिते च पवने ब्रह्मा तुभ्यम् वरम् ददौ । अशस्त्र वध्यताम् तात समरे सत्य विक्रम ॥४-६६-२७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय