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वाल्मीकि रामायण 66.2

वीर वानर लोकस्य सर्व शास्त्र विदाम् वर ।
तूष्णीम् एकांतम् आश्रित्य हनुमन् किम् न जल्पसि ॥४-६६-२॥

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