ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 6666.19वाल्मीकि रामायण 66.19महासात्त्वो महातेज महाबल पराक्रमः । लंघने प्लवने चैव भविष्यति मया समः ॥४-६६-१९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय