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वाल्मीकि रामायण 66.15

स ताम् भुजाभ्याम् दीर्घाभ्याम् पर्यष्वजत मारुतः ।
मन्मथ आविष्ट सर्वान्गो गत आत्मा ताम् अनिन्दिताम् ॥४-६६-१५॥

पूरा अध्याय