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वाल्मीकि रामायण 66.11

विचित्र माल्य आभरणा कदाचित् क्षौम धारिणी ।
अचरत् पर्वतस्य अग्रे प्रावृड् अंबुद सन्निभे ॥४-६६-११॥

पूरा अध्याय