Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 62.12

सर्वथा तु न गंतव्यम् ईदृशः क्व गमिष्यसि ।
देश कालौ प्रतीक्षस्व पक्षौ त्वम् प्रतिपत्स्यसे ॥४-६२-१२॥

पूरा अध्याय