ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 6060.14वाल्मीकि रामायण 60.14अथ पश्यमि दूरस्थम् ऋषिम् ज्वलित तेजसम् । कृत अभिषेकम् दुर्धर्षम् उपावृत्तम् उदन् मुखम् ॥४-६०-१४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय