ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 66.3वाल्मीकि रामायण 6.3रक्षसा अपहृता भार्या मैथिली जनक आत्मजा । त्वया वियुक्ता रुदती लक्ष्मणेन च धीमता ॥४-६-३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय