ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 66.26वाल्मीकि रामायण 6.26हरता मैथिलीम् येन माम् च रोषयता ध्रुवम् । आत्मनो जीवित अन्ताय मृत्यु द्वारम् अपावृतम् ॥४-६-२६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय